मुसलमान को उसके घोड़े और गुलाम की ज़कात नहीं देनी है।
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अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मुसलमान को उसके घोड़े और गुलाम की ज़कात नहीं देनी है।
एक अन्य रिवायत में ये शब्द भी आए हैं: परन्तु गुलाम की ओर से फ़ितरा देना है।
Explanation
इसके उदाहरणस्वरूप हम किसी की सवारी, जैसे घोड़ा, ऊँट, गाड़ी आदी और उसकी सेवा करने वाले दास, बिस्तर और प्रयोग के लिए रखे गए बरतन आदि को ले सकते हैं।
लेकिन दास का फ़ितरा देना होगा, चाहे वह व्यापार का न भी हो, क्योंकि फ़ितरा का संबंध धन से नहीं, बल्कि शरीर से है।
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