افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#3436[सह़ीह़]
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उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास जब भी यमन से सहायक सैन्यदल आते, तो वह पूछते थे कि क्या तुम्हारे बीच उवैस बिन आमिर हैं?

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उसैर बिन अम्र तथा कुछ लोगों के अनुसार उसैर बिन जाबिर का वर्णन है, वह कहते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास जब भी यमन से सहायक सैन्यदल आते, तो वह पूछते थे कि क्या तुम्हारे बीच उवैस बिन आमिर हैं? यहाँ तक एक सैन्यदल के साथ उवैस बिन आमिर आ गए। चुनांचे उनसे कहाः क्या आप उवैस बिन आमिर हैं? उत्तर दियाः हाँ! फ़रमायाः आप मुराद क़बीले की क़र्न शाखा से हैं? कहाः हाँ! फ़रमायाः आपके शरीर पर सफ़ेद दाग़ थे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए हैं? फ़रमायाः हाँ! फ़रमायाः आपकी माता जीवित हैं? कहाः हाँ! फ़रमायाः मैंने अल्लाह रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "तुम्हारे पास यमन से आने वाले सहायक सैन्यदलों के साथ मुराद क़बीले की क़र्न शाखा का एक व्यक्ति उवैस बिन आमिर आएगा। उसके शरीर पर सफ़ेद दाग रहे होंगे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। उसकी माता जीवित होगी, जिसके साथ वह अच्छा व्यवहार कर रहा होगा। अगर वह अल्लाह पर क़सम खा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम को पूरा करेगा। अगर यह हो सके कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे, तो उससे ऐसा करवाना।" अतः, आप मेरे लिए क्षमा याचना करें। चुनांचे उवैस बिन आमिर ने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के लिए क्षमा याचना की। उसके बाद उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उनसे कहाः आप कहाँ जाना चाहते हैं? उन्होंने उत्तर दियाः कूफ़ा। फ़रमायाः क्या मैं आपके लिए कूफ़ा के शासक के नाम एक पत्र लिख दूँ? उन्होंने उत्तर दियाः मुझे ग़रीब तथा गुमनाम लोगों के बीच रहना अधिक पसंद है। जब अगले साल कूफ़ा के सम्मानित लोगों में से एक व्यक्ति हज के लिए आया, तो उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) से उसकी मुलाक़ात हो गई। उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उससे उवैस के बारे में पूछा, तो उसने बतायाः मैंने उन्हें इस हाल में छोड़ा है कि उनका जीवन बहुत सादा है और वह सामान भी बहुत कम रखते हैं। तो फ़रमायाः मैंने अल्लाह रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "तुम्हारे पास यमन से आने वाले सहायक सैन्यदलों के साथ मुराद क़बीले की क़र्न शाखा का एक व्यक्ति उवैस बिन आमिर आएगा। उसके शरीर पर सफ़ेद दाग रहे होंगे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। उसकी माता जीवित होगी, जिसके साथ वह अच्छा व्यवहार कर रहा होगा। अगर वह अल्लाह पर क़सम खा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम को पूरा करेगा। अगर यह हो सके कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे, तो उससे ऐसा करवाना।" चुनांचे यह यमनी व्यक्ति हज के बाद उवैस के पास गया और उनसे कहा कि मेरे लिए क्षमा याचना कीजिए। परन्तु, उन्होंने उत्तर दियाः तुम एक मुबारक सफ़र से नए-नए आए हो, इसलिए ख़ुद तुम मेरे लिए क्षमा याचना करो। फिर (मामले को भाँपते हुए) कहाः क्या तुमको उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) मिले थे? उसने कहाः हाँ! तो फिर उसके लिए क्षमा याचना की। इससे लोग उन्हें पहचान गए और वह वहाँ से कहीं चल दिए।
उसैर बिन जाबिर ही की एक रिवायत में है कि कूफ़ा के लोगों का एक प्रतिनिधि मंडल उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास आया। उनके अंदर एक व्यक्ति ऐसा भी था, जो उवैस का उपहास करने वालों में शामिल था। चुनांचे उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः क्या यहाँ क़र्न क़बीले का कोई व्यक्ति है? तो वही व्यक्ति आया। चुनांचे, उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया हैः "तुम्हारे पास एक यमनी व्यक्ति आएगा, जिसे उवैस कहा जाएगा। वह यमन में केवल अपनी माँ को छोड़कर आया होगा। उसके शरीर पर सफेद दाग रहे होंगे, लेकिन अल्लाह से दुआ करने के कारण एक दीनार या दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। तुममें से जो उससे मिले, वह उससे तुम्हारे लिए क्षमा याचना ज़रूर करवाए।"
तथा उन्हीं की एक रिवायत में हैः "उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "सबसे उत्तम ताबेई एक व्यक्ति है, जो उवैस कहा जाएगा। उसकी माँ जीवित होगी और उसके शरीर पर सफ़ेद दाग होंगे। उससे कहना कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे।"

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[इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।]

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