अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) अल्लाह तआला के इस फरमानः {فَلا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَنْدَادًا وَأَنْتُمْ تَعْلَمُونَ} (अर्थात, तुम अल्लाह के साझी न ठहराओ, जबकि तुम सब कुछ जान रहे हो।) के बारे में कहते हैंः "यहाँ 'الأنداد' से अभिप्राय शिर्क है, जो रात के अंधेरे में काले चिकने पत्थर पर चींटी के चलने से भी अधिक छिपा होता है।"
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) अल्लाह तआला के इस फरमानः {فَلا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَنْدَادًا وَأَنْتُمْ تَعْلَمُونَ} (अर्थात, तुम अल्लाह के साझी न ठहराओ, जबकि तुम सब कुछ जान रहे हो।) के बारे में कहते हैंः "यहाँ 'الأنداد' से अभिप्राय शिर्क है, जो रात के अंधेरे में काले चिकने पत्थर पर चींटी के चलने से भी अधिक छिपा होता है।" उदाहरण स्वरूप तुम कहोः "ऐ अमुक व्यक्ति, अल्लाह तथा तेरे जीवन की कसम", अथवा कहोः "मेरे जीवन की कसम", या फिर कहोः " यदि यह कुतिया नहीं होती, तो हमारे घर में चोर घुस आते", या "अगर घर में यह बत्तख न होता, तो चोर घुस आते", इसी तरह कोई किसी के बारे में कहेः "वही होगा जो अल्लाह और तुम चाहो", या कोई कहेः "अगर अल्लाह और अमुक व्यक्ति न होता"। यहाँ अमुक व्यक्ति को न लाओ। यह सारे के सारे अल्लाह के साथ शिर्क के उदाहरण हैं।
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