HadeethEnc · 1.58.0
ऐ अल्लाह के रसूल, माल-मवेशी हलाक हो गए और रास्ते अवरुद्ध हो गए। अल्लाह से दुआ करें कि हमें वर्षा प्रदान करे
Available translations
Choose an available translation of this Hadeeth
01
Hadeeth text
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है : एक व्यक्ति जुमा के दिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के घर, जो उनकी मृत्यु के बाद उनके कर्ज़ की अदायगी के लिए बिक गया था, की दिशा वाले द्वार से मस्जिद के अंदर आया। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उस समय खड़े हो कर ख़ुतबा दे रहे थे। वह आपकी ओर मुँह करके खड़ा हो गया, फिर बोला : ऐ अल्लाह के रसूल, माल-मवेशी हलाक हो गए और रास्ते अवरुद्ध हो गए। अल्लाह से दुआ करें कि हमें वर्षा प्रदान करे। तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने दोनों हाथ उठाए, फिर कहा : "ऐ अल्लाह, हमें वर्षा प्रदान कर। ऐ अल्लाह हमें वर्षा प्रदान कर। ऐ अल्लाह, हमें वर्षा प्रदान कर।" अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं : क़सम अल्लाह की, हमें आकाश में कोई छोटा-बड़ा बादल का टुकड़ा दिख नहीं रहा था, हमारे और सल्अ़ पहाड़ी के बीच न कोई छोटा घर था, न बड़ा। उनका कहना है कि अचानक सल्अ़ पहाड़ी के पीछे से ढाल की तरह एक बादल का टुकड़ा प्रकट हुआ। फिर आकाश के बीचों-बीच आकर फैल गया और बरसने लगा। क़सम अल्लाह की, हमने छः दिन तक सूरज नहीं देखा।
फिर अगले जुमे को एक आदमी उसी दरवाज़े से अंदर आया। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खड़े होकर ख़ुतबा दे रहे थे। वह आपकी ओर मुँह करके खड़ा हुआ और कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल, माल-मवेशी हलाक हो गए और रास्ते अवरुद्ध हो गए। अल्लाह से दुआ करें कि हमसे वर्षा रोक ले। अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने दोनों हाथ उठाए और कहने लगे : "ऐ अल्लाह, अब हमारे ऊपर नहीं, हमारे आस-पास वर्षा प्रदान कर। ऐ अल्लाह, टीलों, पहाड़ियों, वादियों और पेड़ों के उगने के स्थानों पर बारिश उतार।" वह कहते हैं कि फिर देखते ही देखते बारिश थम गई और हम बाहर निकले तो धूप खिली हुई थी। शरीक कहते हैं : मैंने अनस बिन मालिक से पूछा कि क्या वह (दूसरी बार आने वाला) पहला व्यक्ति ही था? तो उन्होंने कहा : "मुझे नहीं मालूम।"
02
Explanation
एक देहाती जुमा के दिन उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु के घर की दिशा वाले मस्जिद के पश्चिमी द्वार से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मस्जिद में दाखिल हुआइ। उस समय नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खड़े खुत्बा दे रहे थे। उस व्यक्ति ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर मुँह किया, और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मवेशी हलाक हो गए, और सवारी के जानवरों के मरने या भूख से कमज़ोर हो जाने के कारण रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं, अतः अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें वर्षा प्रदान करे। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने दोनों हाथ उठाकर फरमाया : ऐ अल्लाह! हम पर बारिश बरसा, ऐ अल्लाह! हम पर बारिश बरसा, ऐ अल्लाह! हम पर बारिश बरसा। अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : अल्लाह की क़सम, हमें आकाश में बादल का कोई टुकड़ा नहीं दिख रहा था, और हमारे (जो मस्जिद में थे) तथा मस्जिद के पश्चिम में स्थित सल्अ पहाड़ी, जहाँ से बादल आते हैं, के बीच कोई ऐसा छोटा या बड़ा घर नहीं था, जो हमें उसे देखने से रोकता। अनस रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं: अचानक उसके पीछे से छोटी चपटी ढाल की तरह एक गोल बादल का टुकड़ा प्रकट हुआ। फिर जब वह मदीना के आकाश के बीचों-बीच आया, तो फैल गया और बरसने लगा। क़सम अल्लाह की, हमने अगले जुमे तक सूरज नहीं देखा। फिर अगले जुमे को वही आदमी उसी दरवाज़े से दाख़िल हुआ, जब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खड़े होकर ख़ुत्बा दे रहे थे। वह आपके सामने आकर खड़ा हो गया और कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल, माल बर्बाद हो गया और रास्ते बन्द हो गये हैं। आप अल्लाह से दुआ करें कि वह हमसे बारिश रोक ले। वह कहते हैं : अतः आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने हाथ उठाए, फिर फरमाया : ऐ अल्लाह! बारिश को हमारे आस-पास फेर दे, हम पर नहीं। ऐ अल्लाह! उसे ऊँची ज़मीनों जैसे टीलों पर, छोटी पहाड़ियों पर, घाटियों में और पेड़ों के उगने की जगहों पर बरसा। अनस रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं : चुनांचे फौरन बारिश वाला बादल छँट गया और हम धूप में चलने फिरने लगे।
03
Benefits
जीविका की तलाश के लिए साधनों को अपनाना, जैसे दुआ करना और धरती में भाग-दौड़ करना, अल्लाह तआला पर पूर्ण भरोसे के ख़िलाफ बात नहीं है।
बारिश तलब करने के लिए इस नबवी दुआ को पढ़ना मुसतहब है।
जब बारिश से नुक़सान हो तो इस्तिस्हा -यानी साफ़ मौसम और बारिश के रुकने की दुआ करना- जायज़ है। बारिश को टीलों, छोटी पहाड़ियों और घाटियों के निचले हिस्सों तक सीमित रखने की प्रार्थना की गई है, क्योंकि ये स्थान खेती-बाड़ी और चरागाह के लिए ज़्यादा उपयुक्त हैं।
ज़िंदा तथा उपस्थित लोगों में से ऐसे लोगों से दुआ के लिए कहना जायज़ है, जिनके नेक और परहेज़गार होने का गुमान हो, और यह जायज़ तवस्सुल है। रहा किसी मख़लूक़ की जाह (हैसियत) का वसीला बनाना, चाहे वह ज़िंदा हो या मुर्दा, तो यह जायज़ नहीं है; क्योंकि यह शिर्क के साधनों में से है।
आग्रहपूर्वक और बार-बार दुआ करना शरीयत सम्मत है।
जुमा के दिन ज़रूरत पड़ने पर ख़तीब से बात करना जायज़ है।
बारिश बरसाने और उसे रोक लेने में अल्लाह की अद्भुत क्षमता का प्रकट होना।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हिकमत कि बारिश को नुक़सानदेह जगहों से तो रोका जाए, लेकिन जहाँ नुक़सान न हो, वहाँ से न रोका जाए।
खुत्बे में इस्तिसक़ा (बारिश की दुआ) करना शरीयत सम्मत है।
दुआ में दोनों हाथों को उठाना; क्योंकि इसमें मोहताजी का भाव है, और इन दोनों (हाथों) में प्रदान किए जाने के अर्थ की अपेक्षा है। इस अवसर पर दोनों हाथ उठाने पर विद्वानों की सर्वसम्मति है।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत की निशानियों में से एक यह है कि बारिश लाने और उसे रोकने के विषय में आपकी दुआ तुरंत स्वीकार कर ली गई।
बारिश तलब करने के लिए इस नबवी दुआ को पढ़ना मुसतहब है।
जब बारिश से नुक़सान हो तो इस्तिस्हा -यानी साफ़ मौसम और बारिश के रुकने की दुआ करना- जायज़ है। बारिश को टीलों, छोटी पहाड़ियों और घाटियों के निचले हिस्सों तक सीमित रखने की प्रार्थना की गई है, क्योंकि ये स्थान खेती-बाड़ी और चरागाह के लिए ज़्यादा उपयुक्त हैं।
ज़िंदा तथा उपस्थित लोगों में से ऐसे लोगों से दुआ के लिए कहना जायज़ है, जिनके नेक और परहेज़गार होने का गुमान हो, और यह जायज़ तवस्सुल है। रहा किसी मख़लूक़ की जाह (हैसियत) का वसीला बनाना, चाहे वह ज़िंदा हो या मुर्दा, तो यह जायज़ नहीं है; क्योंकि यह शिर्क के साधनों में से है।
आग्रहपूर्वक और बार-बार दुआ करना शरीयत सम्मत है।
जुमा के दिन ज़रूरत पड़ने पर ख़तीब से बात करना जायज़ है।
बारिश बरसाने और उसे रोक लेने में अल्लाह की अद्भुत क्षमता का प्रकट होना।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हिकमत कि बारिश को नुक़सानदेह जगहों से तो रोका जाए, लेकिन जहाँ नुक़सान न हो, वहाँ से न रोका जाए।
खुत्बे में इस्तिसक़ा (बारिश की दुआ) करना शरीयत सम्मत है।
दुआ में दोनों हाथों को उठाना; क्योंकि इसमें मोहताजी का भाव है, और इन दोनों (हाथों) में प्रदान किए जाने के अर्थ की अपेक्षा है। इस अवसर पर दोनों हाथ उठाने पर विद्वानों की सर्वसम्मति है।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत की निशानियों में से एक यह है कि बारिश लाने और उसे रोकने के विषय में आपकी दुआ तुरंत स्वीकार कर ली गई।
Attribution
[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]
Categories
Share
Share hadeeth
Sharing options · 0 Total shares

