अल्लाह -तआला- कहता हैः जब मैं अपने मोमिन बंदे से दुनिया वालों में से उसके किसी प्रिय को उठा लेता हूँ, फिर वह सवाब की आशा में धैर्यवान रहता है, उसके लिए जन्नत के सिवा कुछ और नहीं है।
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अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि अल्लाह -तआला- कहता हैः जब मैं अपने मोमिन बंदे से दुनिया वालों में से उसके किसी प्रिय को उठा लेता हूँ, फिर वह सवाब की आशा में धैर्यवान रहता है, उसके लिए जन्नत के सिवा कोई और बदला नहीं है।
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