افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#2980[स़ह़ीह़]
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जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा।

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01

Hadeeth text

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा।" वर्णनकर्ता कहते हैं कि अशअस -रज़ियल्लाहु अनहु- ने फ़रमाया : यह बात दरअसल मेरे ही बारे में कही गई थी। हुआ यह कि मेरे एवं एक यहूदी के बीच एक ज़मीन को लेकर झगड़ा था। उसने मुझे ज़मीन देने से इनकार कर दिया, तो मैं मामले को अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लेकर गया। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझसे पूछा : "क्या तेरे पास कोई प्रमाण है?" मैंने उत्तर दिया : नहीं। आपने यहूदी से कहा : "तुम क़सम खाओ।" वह कहते हैं कि मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा है तो यह क़सम खा लेगा और मेरा धन लेकर चला जाएगा। तो अल्लाह ने यह आयत उतारी : (निःसंदेह जो लोग अल्लाह के वचन तथा अपनी क़समों के बदले तनिक मूल्य प्राप्त करते हैं।) आयत के अन्त तक।
02

Explanation

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी का धन हड़पने के लिए जान-बूझकर झूठी क़सम खाने से सावधान किया है और बताया है कि ऐसा व्यक्ति जब अल्लाह से मिलेगा, तो अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा। अशअस बिन क़ैस रज़ियल्लाहु अनहु ने इस हदीस का परिप्रेक्ष्य बयान करते हुए बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह बात इसलिए फ़रमाई कि उनके और एक यहूदी के बीच एक ज़मीन के मालिकाना अधिकार को लेकर झगड़ा था। दोनों निर्णय के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास पहुँचे, तो आपने अशअस से कहा : तुम अपने दावा के पक्ष में प्रमाण प्रस्तुत करो। अगर तुम प्रमाण नहीं दे सके, तो तुम्हारा विरोधी क़सम खाकर बरी हो जाएगा। यह सुन अशअस ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! अगर ऐसा है, तो यहूदी अल्लाह का ख़ौफ़ खाए बिना क़सम खा लेगा और मेरा धन लेकर निकल जाएगा। चुनांचे इसी की पुष्टि के लिए अल्लाह ने यह आयत उतारी : निःसंदेह जो लोग अल्लाह के वचन (तथा अमानत की अदायगी से संबंधित ईमान वालों को दिए गए उसके आदेश) तथा (अल्लाह के नाम की) अपनी (झूठी) क़समों के बदले तनिक मूल्य प्राप्त करते हैं, उनका आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं। न अल्लाह उनसे बात करेगा और न क़यामत के दिन (दया तथा उपकार की दृष्टि से) उनकी ओर देखेगा और न उनकी प्रशंसा करके उनके साफ़-सुथरे होने की घोषणा करेगा और न उन्हें (गुनाहों तथा गंदगियों से) पवित्र करेगा। तथा (उनके कर्मों के कारण) उनके लिए दुःखदायी यातना है।
03

Benefits

ग़लत तरीक़े से दूसरे का धन अपने लिए हलाल कर लेने की मनाही।
मुसलमानों का हक़ मारना बहुत बड़ा पाप है। हक़ छोटा हो या बड़ा।
प्रमाण मुद्दई को प्रस्तुत करना है। अगर वह इनकार कर दे, तो जिसके विरुद्ध दावा किया गया है, उसे क़सम खानी है।
हक़ दो गवाहों से साबित होता है। अगर मुद्दई के पास प्रमाण न हो, तो जिसके विरुद्ध दावा किय गया है, उसे क़सम खानी होगी।
किसी का हक़ छीनने के लिए झूठी क़सम खाना हराम तथा कबीरा गुनाह है, जिससे इन्सान अल्लाह के क्रोध तथा दंड का हक़दार बन जाता है।
शासक को दूसरे फ़रीक़ को समझाना चाहिए, ख़ास तौर पर जब वह क़सम खाने जा रहा हो।

Attribution

[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

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