जब रमज़ान का महीना आता है, तो जन्नत के द्वार खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और शैतानों को बेड़ियों में जकड़ दिया जाता है।
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अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब रमज़ान का महीना आता है, तो जन्नत के द्वार खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और शैतानों को बेड़ियों में जकड़ दिया जाता है।"
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इस महीने में रोज़ा रखने वालों के लिए यह सुसमाचार कि यह मुबारक महीना इबादत और नेकी का महीना है।
रमज़ान महीने में शैतानों को ज़ंजीरों से जकड़ दिए जाने में एक तरह से इस बात की ओर इशारा है कि अब शरई आदेशों एवं निषेधों का पालन करने के पाबंद व्यक्ति के लिए हीले-बहाने की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। एक तरह से यह इस बात का एलान है कि अब शैतानों को तुम्हें बहकाने से रोक दिया गया है। इसलिए तुम यह उज़्र और बहाना नहीं सकते कि हम शैतान के बहकावे के कारण नेकी का काम नहीं कर सके या गुनाह से बच नहीं सके।
क़ुर्तुबी कहते हैं : अब अगर यह कहा जाए; हम रमज़ान महीने में बहुत-सी बुराइयाँ और गुनाह होते हुए क्यों देखते हैं? अगर शैतानों को ज़ंजीरों में जकड़ दिया गया है तो ऐसा नहीं होना चाहिए था? इसका जवाब यह है कि गुनाह ऐसे रोज़ेदारों से कम हुआ करते हैं, जो रोज़े की शर्तों तथा आदाब का ख़्याल रखते हुए रोज़ा रखते हैं। एक जवाब यह भी हो सकता है कि ज़ंजीरों में सारे शैतानों को नहीं जकड़ा जाता है, बल्कि केवल सरकश शैतानों को जकड़ा जाता है, जैसा कि कुछ रिवायतों में पीछे गुज़र चुका है। या उद्देश्य इस महीने में गुनाहों को कम करना भी हो सकता है, जिसे हम महसूस भी कर सकते हैं। यह एक सच्चाई है कि इस महीने में दूसरे महीनों की तुलना में कम गुनाह हुआ करते हैं, क्योंकि तमाम शैतानों को ज़ंजीरों में जकड़ दिए जाने से यह लाज़िम नहीं आता कि कोई गुनाह न हो, क्योंकि गुनाह अशुद्ध आत्माओं, बुरी आदतों और इन्सानरुपी शैतानों के कारण भी हुआ करते हैं।
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