ज़कात चार्ट,
यह चार्ट शैख़ डॉक्टर हैस़म सर्ह़ान द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें ज़कात से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख किया गया है। इसमें अनिवार्य और अनुशंसित ज़कात, ज़कात की परिभाषा, वे संपत्तियाँ जिन पर ज़कात अनिवार्य है, एवं ज़कात के पात्र व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, साथ ही, ज़कात से संबंधित प्रमुख फिक़्ही ह़ुक्मों (धार्मिक विधानों) का उल्लेख एक चार्ट में किया गया है।
لوحة الزكاة
اللغة الهندية
زكاة الفطر
#ज़कातुल_फ़ित्र
कैसे आप अपने रोज़े को कमी और मैल से शुद्ध कर सकते हैं?
कैसे आप ग़रीबों और मुहताजों के दिलों में खुशी भर सकते हैं ताकि वे भी ईद पर उसी तरह आनंदित हों जैसे आप होते हैं?
📖 इस हदीस पर ग़ौर करें:
इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है:
"रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ज़कातुल-फ़ित्र को रोज़ेदार के लिए गुनाह और अश्लील बातों से पाक व शुद्ध करने के लिए, और मोहताजों के लिए खाने का प्रबंध करने हेतु फ़र्ज़ (अनिवार्य) करार दिया है"।
🕌 ज़कातुल-फ़ित्र हर मुसलमान पर वाजिब है — अपने ऊपर और उन पर जिनकी ज़िम्मेदारी उसकी है, जैसे पत्नी और बच्चे। यह तब वाजिब होती है जब उसके पास उस दिन अपने और अपने परिवार के खाने से ज़्यादा कुछ हो।
इसके लिए किसी ख़ास माल (निसाब) की शर्त नहीं है।
🌾 हर व्यक्ति की ओर से एक साअ (लगभग ढाई से तीन किलोग्राम) उस अनाज या खाद्य पदार्थ में से देना अनिवार्य है, जो लोगों का मुख्य आहार हो, जैसे खजूर, चावल या दाल।
इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है:
"रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने प्रत्येक मुसलमान पर ज़कातुल-फ़ित्र एक साअ खजूर या जौ के रूप में फ़र्ज़ किया है, चाहे वह गुलाम हो या आज़ाद, मर्द हो या औरत, छोटा हो या बड़ा।"
और आपने हुक्म दिया कि इसे ईद की नमाज़ से पहले अदा किया जाए।
⏳ यह रमज़ान के आख़िरी दिन के सूरज ढलने पर वाजिब होती है।
सबसे बेहतर है कि इसे ईद की नमाज़ से पहले अदा किया जाए।
ईद से एक-दो दिन पहले भी निकालना जायज़ है, यानी 28वीं रात से, क्योंकि महीना कभी 29 दिन का होता है और कभी 30 दिन का।
❗ ईद की नमाज़ के बाद तक इस में देरी करना जायज़ नहीं है।
जो ईद के दिन इसे अदा नहीं करता, वह गुनहगार है, सिवाय इसके कि उसके पास कोई मजबूरी हो। फिर भी उसे बाद में अदा करना ज़रूरी है।
🤲 इसलिए इसे खुशी और नेक नियत से अदा करें।